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19 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला हक: मजदूर का वेतन रुका, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

 19 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला हक: मजदूर का वेतन रुका, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार 


उमरिया। जिले के बिरसिंहपुर क्षेत्र से श्रमिक अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 19 वर्षों से कार्यरत एक मजदूर को अब तक उसका वैधानिक हक नहीं मिल सका। पीड़ित श्रमिक राकेश सिंह (45) ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर वेतन भुगतान रोके जाने और श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

आवेदन के मुताबिक, राकेश सिंह पिछले लगभग 19 वर्षों से लगातार कार्यरत रहे हैं। इस दौरान एक गंभीर दुर्घटना का सामना करने के बावजूद उन्होंने काम जारी रखा। उनका आरोप है कि उन्हें लंबे समय तक मात्र ₹6200 प्रतिमाह के कम वेतन पर काम कराया गया, जो न्यूनतम मजदूरी मानकों के भी अनुरूप नहीं है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि नवंबर 2025 से उनका वेतन और अन्य वैधानिक भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है और परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और इलाज जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।

श्रमिक ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें ईपीएफ, ईएसआई और बोनस जैसे अनिवार्य लाभों से भी वंचित रखा गया। कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वह निराश हैं।

मामले में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है। राकेश सिंह का कहना है कि इतने वर्षों में उनका कभी गेट पास ही नहीं बनाया गया। वर्तमान में भी कई श्रमिक बिना वैध गेट पास के काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि कार्यस्थल पर कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा और श्रमिक मुआवजा, बीमा जैसी सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं।

इस पूरे मामले पर सिंह ट्रांसपोर्ट के साइट मैनेजर संतोष पाण्डेय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पहले हम साथ में काम करते थे, अब नहीं करते हैं। हमारा कोई लेना-देना नहीं है। वे कंपनी के पास जाएं, वहीं से जो संभव होगा किया जाएगा।”

फिलहाल, मामला प्रशासन के संज्ञान में है। अब देखना होगा कि श्रमिक को उसके अधिकार दिलाने के लिए संबंधित विभाग क्या कदम उठाता है।

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