त्याग, समर्पण और इंसानियत का संदेश देता है ईद-उल-अजहा : हाफिज इमरान
इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा त्याग, बलिदान, समर्पण और मानवता का संदेश देने वाला पवित्र त्योहार है। यह पर्व लोगों को अल्लाह की राह में कुर्बानी, आपसी भाईचारे और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश देता है। ईद-उल-अजहा को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, जिसे मुस्लिम समाज बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाता है।
इस अवसर पर "मस्जिद उमर बिन खत्ताब" के इमाम हाफिज इमरान ने कहा कि ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी की याद में मनाई जाती है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम को कुर्बान करने का संकल्प लिया था। उनकी इस अटूट आस्था और समर्पण से प्रसन्न होकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक दुंबा भेज दिया। तभी से यह पर्व कुर्बानी और त्याग की मिसाल के रूप में मनाया जाता है।
हाफिज इमरान ने कहा कि ईद-उल-अजहा केवल पशु कुर्बानी का पर्व नहीं, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों, अहंकार और स्वार्थ को त्यागने का संदेश भी देता है। इस दिन लोग नमाज अदा कर देश में अमन, शांति, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगते हैं तथा जरूरतमंदों के बीच कुर्बानी का हिस्सा बांटकर इंसानियत की मिसाल पेश करते हैं।
उन्होंने सभी लोगों से प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि त्योहार समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं और हमें मिल-जुलकर खुशियां बांटनी चाहिए।

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