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टेंडर में अंदरूनी खेल का शक, श्रमिकों को हटाने के मामले ने पकड़ा तूल

 टेंडर में अंदरूनी खेल का शक, श्रमिकों को हटाने के मामले ने पकड़ा तूल





मंगठार। संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंहपुर में श्रमिकों को बिना कारण कार्य से हटाए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने जहां श्रमिकों में आक्रोश पैदा किया है, वहीं अब कार्यादेश और टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजीव तिवारी नवंबर 2025 से OPTIMINER EXECUTORS Pvt. Ltd. के अंतर्गत स्टोन पिकर इंचार्ज के रूप में कार्यरत था। उसके पास कंपनी द्वारा जारी वैध एंट्री पास/आईडी कार्ड एवं कार्यादेश भी मौजूद है, जिससे उसके अधिकृत कर्मचारी होने की पुष्टि होती है।

बताया जाता है कि 27 मार्च 2026 को कार्य के दौरान एक श्रमिक घायल हो गया, जिसे राजीव तिवारी ने मानवता के नाते तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार करवाया। लेकिन इसके ठीक तीन दिन बाद, 30 मार्च को अधीक्षण अभियंता बी.के.एस. बघेल द्वारा उसे बिना किसी स्पष्ट कारण के कार्य से हटा दिया गया। इतना ही नहीं, घायल श्रमिक की मदद करने वाले अन्य कर्मचारियों को भी कार्य से हटा दिए जाने का आरोप है।

श्रमिकों में आक्रोश, कार्रवाई पर उठे सवाल

इस कार्रवाई को श्रमिकों ने अन्यायपूर्ण और अमानवीय बताते हुए विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि अधीक्षण अभियंता बघेल के कार्यकाल में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि श्रमिकों को मनमाने ढंग से कार्य से बैठा दिया जाता है और उनकी पंचिंग तक कंपनी से हटवा दी जाती है, जिससे कंपनी और संबंधित अधिकारियों को सीधा लाभ मिलता है।

श्रमिकों का यह भी कहना है कि बघेल की ऊंची पहुंच और रसूख के चलते उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती।

टेंडर और कार्यादेश पर बड़ा सवाल

मामले में अब एक और बड़ा सवाल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, सीएचपी (CHP) साइड का पूरा कार्य चेन्नई राधा इंजिनियरिंग वर्क्स के पास है। ऐसे में अलग से “स्टोन पिकर” कार्य के लिए टेंडर जारी होना संदेह के घेरे में है।

बताया जा रहा है कि इस कार्य से संबंधित टेंडर नंबर 2026_UAD_473350_2 है। श्रमिकों ने सवाल उठाया है कि यह टेंडर कब और किन परिस्थितियों में जारी किया गया और क्या इसमें किसी प्रकार का अंदरूनी खेल हुआ है।

श्रमिकों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कार्यादेश, टेंडर प्रक्रिया और कंपनी के रिकॉर्ड से कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

जांच और बहाली की मांग तेज

पीड़ित श्रमिक ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा उसे पुनः कार्य पर बहाल किए जाने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।

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