बिना पंजीयन संचालित अस्पताल-क्लीनिकों पर सख्ती: 89 क्लीनिक और कई अस्पतालों पर कार्रवाई के निर्देश, संचालन बंद करने का आदेश
जबलपुर। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों के पंजीयन नवीनीकरण को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। जारी मीडिया विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों ने निर्धारित समय में पंजीयन नवीनीकरण नहीं कराया है या जिनका पंजीयन निरस्त/अस्वीकृत हो गया है, उनके संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश शासन के प्रावधानों के तहत निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का पंजीयन प्रत्येक तीन वर्ष में अनिवार्य रूप से नवीनीकरण किया जाता है। यह प्रक्रिया हर वर्ष 1 जनवरी से 28 फरवरी तक MP Online पोर्टल के माध्यम से संपन्न होती है, जिसके बाद संबंधित संस्थानों का निरीक्षण किया जाता है।
वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 55 अस्पतालों के पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित थे, जिनमें से 2 अस्पतालों ने स्वयं बंद करने का आवेदन दिया, एक अस्पताल ने आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया, एक के दस्तावेज सत्यापित नहीं हो सके और एक अस्पताल निरीक्षण के दौरान आवश्यक स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण मानकों पर खरा नहीं उतर पाया।
इसी प्रकार जिले में कुल 240 क्लीनिकों में से 89 क्लीनिकों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया, जबकि 32 क्लीनिकों द्वारा अधूरे एवं त्रुटिपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिसके चलते उनका नवीनीकरण नहीं हो सका।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे सभी अस्पताल एवं क्लीनिक तत्काल प्रभाव से नए मरीजों की भर्ती बंद करें, वर्तमान में भर्ती मरीजों का उपचार पूर्ण कर उन्हें डिस्चार्ज करें तथा संस्थान का संचालन बंद कर दें। साथ ही, जिन संस्थानों का पंजीयन निरस्त या अस्वीकृत किया गया है, उन्हें अपने अस्पताल या क्लीनिक के नाम-पट्ट भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिन संस्थानों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उन्हें MP Online के माध्यम से शीघ्र आवेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है, हालांकि निरीक्षण में मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही उन्हें पुनः संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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