शव वाहन न मिलने पर बेटों ने स्कूटी पर बांधा पिता का शव, सरकारी अस्पताल की लापरवाही ने मानवता को किया शर्मसार
मध्य प्रदेश के सीधी जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां सेमरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही के चलते एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। इतना ही नहीं, मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया, जिससे मजबूर होकर बेटों को अपने पिता के शव को स्कूटी पर बांधकर घर ले जाना पड़ा।
आधी रात अस्पताल में नहीं मिला इलाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामसजीवन गुप्ता नामक बुजुर्ग को अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन देर रात सेमरिया अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उनके साथ बेटे, पत्नी और अन्य परिजन भी मौजूद थे। परिजनों का आरोप है कि उस समय अस्पताल में न तो ड्यूटी डॉक्टर मौजूद थे और न ही कोई जिम्मेदार स्टाफ, जिसके कारण समय पर इलाज नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि मरीज दर्द से तड़पता रहा, लेकिन इलाज के अभाव में उसने दम तोड़ दिया। इस दौरान परिजन मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मौत के बाद भी नहीं मिली सुविधा
मरीज की मौत के बाद परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने न तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई और न ही शव वाहन की व्यवस्था की। रात का समय होने के कारण परिजन और भी असहाय हो गए।
स्कूटी बनी शव वाहन
अंततः मजबूरी में बेटों ने अपने पिता के शव को स्कूटी पर बीच में बैठाकर कपड़ों और सहारे से बांधा और किसी तरह घर तक ले गए। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर हर कोई सन्न रह गया। घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर अस्पतालों में समय पर डॉक्टर और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं। यह मामला न केवल लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति भी उजागर करता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि अस्पतालों में 24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता और शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

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