संवेदनशीलता की मिसाल: सड़क हादसे के घायलों को देख रुकीं सांसद हिमाद्री सिंह, 'ऑन द स्पॉट' एक्शन से सिस्टम में मचाया हड़कंप
शहडोल। राजनीति जब मानवीय संवेदनाओं से मिलती है, तो वह सेवा का सबसे सुंदर स्वरूप बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा शहडोल-बुढार मार्ग पर स्थित नेशनल हाईवे 43 (NH 43) पर देखने को मिला, जहां सांसद हिमाद्री सिंह ने एक सक्रिय जनप्रतिनिधि और एक संवेदनशील इंसान की दोहरी भूमिका निभाते हुए मिसाल पेश की।
हादसे के बाद खुद संभाला मोर्चा
जानकारी के अनुसार, सांसद हिमाद्री सिंह शहडोल में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने गृहग्राम अनूपपुर की ओर लौट रही थीं। जैसे ही उनका काफिला किया (Kia) शोरूम के समीप पहुंचा, वहां गोडारु के ग्रामीणों के साथ हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे को देख सांसद खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने तुरंत अपना वाहन रुकवाया और सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना सीधे घायलों के बीच पहुंच गईं,वहां की स्थिति काफी गंभीर थी; गोडारु के ग्रामीण चोटिल होकर सड़क किनारे मदद का इंतजार कर रहे थे। सांसद ने न केवल उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि घायल महिलाओं और बच्चों के आंसू पोंछते हुए उन्हें हिम्मत दी। उनकी इस मौजूदगी ने घायलों को यह एहसास कराया कि प्रशासन और शासन उनके साथ खड़ा है।
सांसद का 'ऑन द स्पॉट' एक्शन: CMHO को दी हिदायत
सांसद हिमाद्री सिंह ने घटनास्थल से ही अपनी सक्रियता दिखाई और तत्काल स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को फोन लगाया। उन्होंने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से सीधे बात की और लहजे में तल्खी दिखाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए। सांसद ने फोन पर कहा, "चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी तरह की कोताही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। घायलों को तुरंत एंबुलेंस और उचित उपचार मिलना चाहिए।"सांसद के सख्त रुख और मौके पर उनकी मौजूदगी का असर यह हुआ कि जो सरकारी अमला आमतौर पर सुस्त नजर आता है, वह चंद मिनटों में हरकत में आ गया। मौके पर एंबुलेंस पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
पीड़ित मानवता की सेवा के लिए रुकीं राहें
अमूमन वीआईपी काफिले हादसों को देखकर अक्सर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन हिमाद्री सिंह ने यह साबित किया कि उनके लिए जनसेवा प्रोटोकॉल से ऊपर है। उनके इस 'ऑन द स्पॉट' एक्शन ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। लोगों का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि खुद सड़क पर उतरकर मोर्चा संभालता है, तो सिस्टम को न केवल जवाबदेह होना पड़ता है, बल्कि उसे अपनी गति भी बढ़ानी पड़ती है।
शहडोल की सड़कों पर दिखा सांसद का यह रूप राजनीति के उस मानवीय चेहरे को दर्शाता है, जिसकी आज समाज को सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने न केवल गोडारु के पीड़ितों के लिए इलाज का इंतजाम कराया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जनता की सेवा ही उनकी पहली प्राथमिकता है।

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